बरसात में वर्षों पुरानी आवागमन की समस्या दूर, ग्रामीणों और विद्यार्थियों को मिलेगा सीधा लाभ
सिविक एक्शन प्रोग्राम के तहत साइकिल एवं दैनिक उपयोग की सामग्री का वितरण
नारायणपुर, 16 जुलाई 2026।
पूर्व में नक्सल प्रभावित और दुर्गम जाटलूर क्षेत्र में विकास की दिशा में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की 38वीं वाहिनी ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। जाटलूर नाला पर लगभग 250 फीट लंबे लकड़ी के फुट सस्पेंशन ब्रिज का निर्माण कर क्षेत्र के ग्रामीणों, विद्यार्थियों और सुरक्षा बलों को वर्षभर सुरक्षित आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इस पुल का लोकार्पण केंद्रीय सीमांत मुख्यालय के महानिरीक्षक श्री अजय पाल सिंह ने किया।
लगभग 250 फीट लंबा, 5 फीट चौड़ा और 15 फीट ऊँचा यह पुल आईटीबीपी के जवानों एवं स्थानीय ग्रामीणों के संयुक्त श्रमदान और स्थानीय संसाधनों के उपयोग से तैयार किया गया है। बरसात के दौरान जाटलूर नाला उफान पर होने से आवागमन पूरी तरह बाधित हो जाता था, जिससे ग्रामीणों, स्कूली विद्यार्थियों और मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। पुल बनने से अब यह समस्या काफी हद तक समाप्त हो जाएगी।
लोकार्पण समारोह में कमांडेंट श्री राजीव गुप्ता (45वीं वाहिनी), श्री अभिषेक सूद (29वीं वाहिनी), द्वितीय कमान श्री अशोक कुमार सिंह (38वीं वाहिनी) एवं श्री संजय कुमार (53वीं वाहिनी) सहित आईटीबीपी के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय जनप्रतिनिधि, ग्रामीण, शिक्षक और छात्र-छात्राओं ने भी भाग लिया।
इस अवसर पर सिविक एक्शन प्रोग्राम (CAP) के तहत स्कूली विद्यार्थियों एवं जरूरतमंद ग्रामीणों को साइकिल और दैनिक उपयोग की सामग्री वितरित की गई। साथ ही स्वरोजगार, कौशल विकास और शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देकर ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान पुल निर्माण में उल्लेखनीय योगदान देने वाले अधिकारियों और जवानों को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया। महानिरीक्षक श्री अजय पाल सिंह ने घोषणा की कि इस सस्पेंशन ब्रिज का नाम नक्सल विरोधी अभियान में सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीद अमोल माधव राव महस्के की स्मृति में रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि यह पुल शहीद के अदम्य साहस, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा का प्रतीक रहेगा तथा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा।
कार्यक्रम के अंत में ग्रामीणों एवं विद्यार्थियों के बीच मिठाइयों का वितरण किया गया तथा सामूहिक भोज का आयोजन भी हुआ। स्थानीय लोगों ने आईटीबीपी की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह पुल केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि क्षेत्र के विकास, जनसुविधाओं और सुरक्षा बलों तथा ग्रामीणों के बीच विश्वास की मजबूत कड़ी भी बनेगा।
मुख्य बिंदु
- 250 फीट लंबा लकड़ी का सस्पेंशन ब्रिज तैयार।
- बरसात में आवागमन की वर्षों पुरानी समस्या का समाधान।
- स्थानीय ग्रामीणों और आईटीबीपी के संयुक्त श्रमदान से हुआ निर्माण।
- विद्यार्थियों को साइकिल एवं जरूरतमंदों को उपयोगी सामग्री वितरित।
- पुल का नाम शहीद अमोल माधव राव महस्के की स्मृति में रखा जाएगा।


